कहां है: श्री मुक्तसर साहिब Sri Muktsar Sahib पंजाब Punjab का एक ऐतिहासिक शहर Historical City है। यह पंजाब का एक जिला District है जो पंजाब के दक्षिण पश्चिमी भाग में स्थित है। यह जिला हरियाणा की ओर पंजाब का प्रवेश द्वार Gateway to Punjab भी है।
कैसे पहुंचें: श्री मुक्तसर साहिब रेलवे Rail and Road और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। चंडीगढ़ से इसकी दूरी 250 किमी है। अमृतसर Amritsar से इसकी दूरी 175 किमी है।
इतिहास: सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी Sri Guru Gobind Singh ji 1704 में आनंदपुर साहिब Sri Aanadpur Sahib के किले में थे. तभी मुगल सेना ने किले को घेर लिया था। ये घेराबंदी काफी लंबे समय तक चली. इधर, पंजाब के माझा इलाके से कुछ सिख बेदावा (रिस्ता तोड़ने का पत्र) लिख गुरु जी को छोड़ किला छोड़ आए। जब वे अपने घर पहुंचे तो गुरु साहिब को इस तरह छोड़ने के लिए उनके परिवारों ने उन्हें गलत बताया । इसी बीच गुरु गोबिंद सिंह मुगल साम्राज्य के घेरे से बाहर निकले और विभिन्न स्थानों से होते हुए पंजाब के इस मालवा Malwa of Punjab क्षेत्र में आये। इस दौरान गुरुजी की माता जी और चार साहिबजादे भी शहीद हो गये। मुगल सेना गुरुजी का पीछा कर रही थी।
जब गुरु जी श्री मुक्तसर साहिब के स्थान पर पहुंचे, जिसे उस समय खिदराने का ढाब (तालाब) कहा जाता था, तब माई भागो Mai Bhago ji के नेतृत्व में 40 सिख गुरु जी से मिले और मुगल सेना से लड़ते हुए शहीद हो गए। इस युद्ध में गुरूजी की विजय हुई और मुगल सेना भाग गयी।
युद्ध के अंत में गुरु साहिब ने इन शहीद सिखों की देखभाल की और इस समय केवल भाई महा सिंह ही जीवित थे। गुरुजी ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो उन्होंने श्री आनंदपुर साहिब में लिखे बेदावा को फाड़ने का अनुरोध किया। गुरु जी ने बेदावा फाड् दिया और अपने सिखों से नाता जोड़ दिया और इस स्थान को मुक्ति सर (जलाशय जहां लोग मोक्ष पा सकते हैं) की उपाधि दी। गुरु साहिब ने स्वयं इन शहीदों का अंतिम संस्कार किया।
इस स्थान पर आगे चलकर श्री मुक्तसर साहिब नगर बसा।
ऐतिहासिक स्थान: जैसा कि ऊपर बताया गया है, श्री मुक्तसर साहिब में सिख इतिहास वाले कई गुरुद्वारे हैं।
1. गुरुद्वारा दरबार साहिब: यह यहां का मुख्य गुरुद्वारा है जो एक बड़े सरोवर के किनारे पर है। इसेगुरुद्वारा दरबार साहिब
गुरुद्वारा टूटी
गंढी साहिब (वह स्थान जहां टूटे रिश्ते जुड़ते हैं) भी कहा जाता है। इसके साथ ही वह वन का पेड़ आज भी मौजूद है जहां गुरु साहिब ने अपना घोड़ा बांधा था।
2. गुरुद्वारा शहीद गंज: गुरुद्वारा शहीद गंज गुरुद्वारा दरबार साहिब के ठीक बगल में है। इस स्थान पर गुरु साहिब ने श्री मुक्तसर साहिब के युद्ध में शहीद हुए 40 सिंहों का अंतिम संस्कार किया था।
3. गुरुद्वारा माई भागो: Gurudwara Mai Bhago माई भागो एक बहादुर सिख महिला थीं, जिन्होंने माझे के 40 सिंहों को गुरु साहिब की शरण में वापस लाया और उन्होंने खुद श्री मुक्तसर साहिब की लड़ाई में भाग लिया और कई मुगलों को मार डाला। उन्हीं की स्मृति में इस गुरुद्वारा परिसर में यह गुरुद्वारा है।
| गुरुद्वारा टिब्बी साहिब |
5. गुरुद्वारा टिब्बी साहिब: यह Gurudawara Tibbi Sahib गुरुद्वारा उपरोक्त चारों गुरुद्वारों से थोड़ा दूर है। वहाँ मिट्टी का एक
ऊँचा टीला था जहाँ से श्री गुरु गोबिंद सिंह जी उक्त युद्ध में शत्रुओं पर तीर चलाते थे। वर्तमान में यहां गुरुद्वारा साहिब बना है।
6. अन्य गुरुद्वारा साहिब: इसके अलावा गुरुद्वारा रकाबसर साहिब और दातन सर साहिब भी श्रीगुरुद्वारा रकाबसर साहिब
मुक्तसर साहिब में स्थित हैं। इसी प्रकार, सिखों के दसवें गुरु, श्री गोबिंद सिंह जी से संबंधित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारे, जैसे गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब छतियाना, भी उसी जिले में श्री मुक्तसर साहिब से 24 किमी दूर हैं। इसी प्रकार रूपाणा, गुरुसर, फक्करसर गांवों में भी ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं।
दूसरे सिख गुरु श्री गुरु अंगद देव जी का जन्मस्थान भी इसी जिले के सरायनागा गांव में है जो श्री मुक्तसर साहिब से 15 किमी दूर है और यह श्री मुक्तसर साहिब कोटकपुरा रोड पर स्थित है।
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| मुक्ता-ए-मीनार स्मारक |
8. मुक्ता-ए-मीनार स्मारक: Mukt-e-Minar यह 40 मुक्ताओं का स्मारक है जिसे 2004 में बनाया गया था। इसके
अलावा शहर की मुख्य सड़कों पर स्मृति द्वार भी बनाये गये हैं।
हस्तशिल्प: श्री मुक्तसर साहिब की पंजाबी जूतियां Punjabi Jutti पूरी दुनिया में मशहूर हैं। अगर आप यहां आएं तो इसे खरीदना न भूलें।
मेले और त्यौहार: श्री मुक्तसर साहिब में, माघ महीने के संग्राद पर (आमतौर पर हर साल 13 या 14 जनवरी को) एक बहुत बड़ा शहीदी ज़ोड मेला Maghi Mela of Muktsar आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर लाखों लोग यहां आते हैं। देशभर से विभिन्न हस्तशिल्प के निर्माता भी इस समय अपना सामान लेकर यहां पहुंचते हैं। इसे माघी मेला के नाम से भी जाना जाता है।
कहाँ ठहरें: श्री मुक्तसर साहिब में अनेक अच्छे होटल उपलब्ध हैं। इसके अलावा यहां गुरुद्वारा श्रीरेलवे स्टेशन
दरबार साहिब में गुरुद्वारा साहिब की सराय (धर्मशाला) भी है जहां रुका जा सकता है।

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